Chanakya Niti Shlokas in Hindi – Chapter 4

Chanakya Niti Shlokas (चाणक्य नीति श्लोक)

Acharya Chanakya of patliputra studied from Taxila now in Pakistan. Kautiya was a great economist , teacher and Minister and had the idea Akhand Bharat. He wrote many Psychological and duties and his ways for forming a great Ruler and who makes his Akhand Bharat prosperous.

आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।
पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 1)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

निम्नलिखित बातें माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाती है…. १. व्यक्ति कितने साल जियेगा २. वह किस प्रकार का काम करेगा ३. उसके पास कितनी संपत्ति होगी ४. उसकी मृत्यु कब होगी .

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok2)

साधुभ्यस्ते निवर्तन्ते पुत्रमित्राणि बान्धवाः ।
ये च तैः सह गन्तारस्तद्धर्मात्सुकृतं कुलम् ॥

Meaning in Hindi (भावार्थ )

पुत्र , मित्र, सगे सम्बन्धी साधुओं को देखकर दूर भागते है, लेकिन जो लोग साधुओं का अनुशरण करते है उनमे भक्ति जागृत होती है और उनके उस पुण्य से उनका सारा कुल धन्य हो जाता है

दर्शनध्यानसंस्पर्शैर्मत्सी कूर्मी च पक्षिणी ।
शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जन-संगतिः ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 3)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जैसे मछली दृष्टी से, कछुआ ध्यान देकर और पंछी स्पर्श करके अपने बच्चो को पालते है, वैसे ही संतजन पुरुषों की संगती मनुष्य का पालन पोषण करती है.

यावत्स्वस्थो ह्ययं देहो यावन्मृत्युश्च दूरतः ।
तावदात्महितं कुर्यात्प्राणान्ते किं करिष्यति ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok4)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जब आपका शरीर स्वस्थ है और आपके नियंत्रण में है उसी समय आत्मसाक्षात्कार का उपाय कर लेना चाहिए क्योंकि मृत्यु हो जाने के बाद कोई कुछ नहीं कर सकता है

कामधेनुगुणा विद्या ह्यकाले फलदायिनी ।
प्रवासे मातृसदृशी विद्या गुप्तं धनं स्मृतम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 5)


Meaning in Hindi (भावार्थ )

विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के समान है जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है. वह विदेश में माता के समान रक्षक अवं हितकारी होती है. इसीलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है.

एकोऽपि गुणवान्पुत्रो निर्गुणेन शतेन किम् ।
एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च ताराः सहस्रशः ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 6)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के समान है जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है. वह विदेश में माता के समान रक्षक अवं हितकारी होती है. इसीलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है.

मूर्खश्चिरायुर्जातोऽपि तस्माज्जातमृतो वरः ।
मृतः स चाल्पदुःखाय यावज्जीवं जडो दहेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok7)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

एक ऐसा बालक जो जन्मते वक़्त मृत था, एक मुर्ख दीर्घायु बालक से बेहतर है. पहला बालक तो एक क्षण के लिए दुःख देता है, दूसरा बालक उसके माँ बाप को जिंदगी भर दुःख की अग्नि में जलाता है.

कुग्रामवासः कुलहीनसेवा
कुभोजनं क्रोधमुखी च भार्या ।
पुत्रश्च मूर्खो विधवा च कन्या
विनाग्निना षट्प्रदहन्ति कायम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 8)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

निम्नलिखित बाते व्यक्ति को बिना आग के ही जलाती है… १. एक छोटे गाव में बसना जहा रहने की सुविधाए उपलब्ध नहीं. २. एक ऐसे व्यक्ति के यहाँ नौकरी करना जो नीच कुल में पैदा हुआ है. ३. अस्वास्थय्वर्धक भोजन का सेवन करना. ४. जिसकी पत्नी हरदम गुस्से में होती है. ५. जिसको मुर्ख पुत्र है. ६. जिसकी पुत्री विधवा हो गयी है.

किं तया क्रियते धेन्वा या न दोग्ध्री न गर्भिणी ।
कोऽर्थः पुत्रेण जातेन यो न विद्वान् न भक्तिमान् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 9)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

वह गाय किस काम की जो ना तो दूध देती है ना तो बच्चे को जन्म देती है. उसी प्रकार उस बच्चे का जन्म किस काम का जो ना ही विद्वान हुआ ना ही भगवान् का भक्त हुआ.

संसारतापदग्धानां त्रयो विश्रान्तिहेतवः ।
अपत्यं च कलत्रं च सतां सङ्गतिरेव च ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 10)

Chanakya Niti Shlokas in Hindi

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जब व्यक्ति जीवन के दुःख से झुलसता है उसे निम्नलिखित ही सहारा देते है… १. पुत्र और पुत्री २. पत्नी ३. भगवान् के भक्त.

सकृज्जल्पन्ति राजानः सकृज्जल्पन्ति पण्डिताः ।
सकृत्कन्याः प्रदीयन्ते त्रीण्येतानि सकृत्सकृत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 11)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

यह बाते एक बार ही होनी चाहिए.. १. राजा का बोलना. २. बिद्वान व्यक्ति का बोलना. ३. लड़की का ब्याहना.

एकाकिना तपो द्वाभ्यां पठनं गायनं त्रिभिः ।
चतुर्भिर्गमनं क्षेत्रं पञ्चभिर्बहुभी रणः ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 12)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जब आप तप करते है तो अकेले करे. अभ्यास करते है तो दुसरे के साथ करे. गायन करते है तो तीन लोग करे. कृषि चार लोग करे. युद्ध अनेक लोग मिलकर करे.

सा भार्या या शुचिर्दक्षा सा भार्या या पतिव्रता ।
सा भार्या या पतिप्रीता सा भार्या सत्यवादिनी ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 13)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

वही अच्छी पत्नी है जो शुचिपूर्ण है, पारंगत है, शुद्ध है, पति को प्रसन्न करने वाली है और सत्यवादी है.

अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यास्त्वबान्धवाः ।
मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्या दरिद्रता ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 14)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जिस व्यक्ति के पुत्र नहीं है उसका घर उजाड़ है. जिसे कोई सम्बन्धी नहीं है उसकी सभी दिशाए उजाड़ है. मुर्ख व्यक्ति का ह्रदय उजाड़ है. निर्धन व्यक्ति का सब कुछ उजाड़ है.

अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम् ।
दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 15)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जिस अध्यात्मिक सीख का आचरण नहीं किया जाता वह जहर है. जिसका पेट ख़राब है उसके लिए भोजन जहर है. निर्धन व्यक्ति के लिए लोगो का किसी सामाजिक या व्यक्तिगत कार्यक्रम में एकत्र होना जहर है.

त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् ।
त्यजेत्क्रोधमुखीं भार्यां निःस्नेहान्बान्धवांस्त्यजेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 16)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

जिस व्यक्ति के पास धर्म और दया नहीं है उसे दूर करो. जिस गुरु के पास अध्यात्मिक ज्ञान नहीं है उसे दूर करो. जिस पत्नी के चेहरे पर हरदम घृणा है उसे दूर करो. जिन रिश्तेदारों के पास प्रेम नहीं उन्हें दूर करो.

अध्वा जरा देहवतां पर्वतानां जलं जरा ।
अमैथुनं जरा स्त्रीणां वस्त्राणामातपो जरा ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 17)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

सतत भ्रमण करना व्यक्ति को बूढ़ा बना देता है. यदि घोड़े को हरदम बांध कर रखते है तो वह बूढा हो जाता है. यदि स्त्री उसके पति के साथ प्रणय नहीं करती हो तो बुढी हो जाती है. धुप में रखने से कपडे पुराने हो जाते है.

कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ ।
कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 18)

Meaning in Hindi (भावार्थ )

इन बातो को बार बार गौर करे… सही समय सही मित्र सही ठिकाना पैसे कमाने के सही साधन पैसे खर्चा करने के सही तरीके आपके उर्जा स्रोत.

Chanakya Niti (Chap. 4 – Shlok 19)

अग्निर्देवो द्विजातीनां मुनीनां हृदि दैवतम् ।
प्रतिमा स्वल्पबुद्धीनां सर्वत्र समदर्शिनः ॥

Meaning in Hindi (भावार्थ )

द्विज अग्नि में भगवान् देखते है. भक्तो के ह्रदय में परमात्मा का वास होता है. जो अल्प मति के लोग है वो मूर्ति में भगवान् देखते है. लेकिन जो व्यापक दृष्टी रखने वाले लोग है, वो यह जानते है की भगवान सर्व व्यापी है.

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