Chanakya Niti Shlokas Translation in Hindi Chapter 12

Chanakya Niti Shlokas (चाणक्य नीति श्लोक)

यस्य चित्तं द्रवीभूतं कृपया सर्वजन्तुषु ।
तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटाभस्मलेपनैः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 1)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह व्यक्ति जिसका ह्रदय हर प्राणी मात्र के प्रति करुणा से पिघलता है. उसे जरुरत क्या है किसी ज्ञान की, मुक्ति की, सर के ऊपर जटाजूट रखने की और अपने शारीर पर राख मलने की.


एकमप्यक्षरं यस्तु गुरुः शिष्यं प्रबोधयेत् ।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद्दत्त्वा सोऽनृणी भवेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 2)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

इस दुनिया में वह खजाना नहीं है जो आपको आपके सदगुरु ने ज्ञान का एक अक्षर दिया उसके कर्जे से मुक्त कर सके.


खलानां कण्टकानां च द्विविधैव प्रतिक्रिया ।
उपानन्मुखभङ्गो वा दूरतो वा विसर्जनम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 3)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

काटो से और दुष्ट लोगो से बचने के दो उपाय है. पैर में जुते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो की वो अपना सर उठा ना सके और आपसे दूर रहे.


कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणं
बह्वाशिनं निष्ठुरभाषिणं च ।
सूर्योदये चास्तमिते शयानं
विमुञ्चति श्रीर्यदि चक्रपाणिः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 4)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो अस्वच्छ कपडे पहनता है. जिसके दात साफ़ नहीं. जो बहोत खाता है. जो कठोर शब्द बोलता है. जो सूर्योदय के बाद उठता है. उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जायेगा.


त्यजन्ति मित्राणि धनैर्विहीनं
पुत्राश्च दाराश्च सुहृज्जनाश्च ।
तमर्थवन्तं पुनराश्रयन्ति
अर्थो हि लोके मनुष्यस्य बन्धुः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 5)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जब व्यक्ति दौलत खोता है तो उसके मित्र, पत्नी, नौकर, सम्बन्धी उसे छोड़कर चले जाते है. और जब वह दौलत वापस हासिल करता है तो ये सब लौट आते है. इसीलिए दौलत ही सबसे अच्छा रिश्तेदार है.


अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति ।
प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं तद्विनश्यति ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 6)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

पाप से कमाया हुआ पैसा दस साल रह सकता है. ग्यारवे साल में वह लुप्त हो जाता है, उसकी मुद्दल के साथ.


अयुक्तं स्वामिनो युक्तं युक्तं नीचस्य दूषणम् ।
अमृतं राहवे मृत्युर्विषं शङ्करभूषणम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 7)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक महान आदमी जब कोई गलत काम करता है तो उसे कोई कुछ नहीं कहता. एक नीच आदमी जब कोई अच्छा काम भी करता है तो उसका धिक्कार होता है. देखिये अमृत पीना तो अच्छा है लेकिन राहू की मौत अमृत पिने से ही हुई. विष पीना नुकसानदायी है लेकिन भगवान् शंकर ने जब विष प्राशन किया तो विष उनके गले का अलंकार हो गया.


तद्भोजनं यद्द्विजभुक्तशेषं
तत्सौहृदं यत्क्रियते परस्मिन् ।
सा प्राज्ञता या न करोति पापं
दम्भं विना यः क्रियते स धर्मः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 8 )

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक सच्चा भोजन वह है जो ब्राह्मण को देने के बाद शेष है. प्रेम वह सत्य है जो दुसरो को दिया जाता है. खुद से जो प्रेम होता है वह नहीं. वही बुद्धिमत्ता है जो पाप करने से रोकती है. वही दान है जो बिना दिखावे के किया जाता है


मणिर्लुण्ठति पादाग्रे काचः शिरसि धार्यते ।
क्रयविक्रयवेलायां काचः काचो मणिर्मणिः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 9 )

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि आदमी को परख नहीं है तो वह अनमोल रत्नों को तो पैर की धुल में पडा हुआ रखता है और घास को सर पर धारण करता है. ऐसा करने से रत्नों का मूल्य कम नहीं होता और घास के तिनको की महत्ता नहीं बढती. जब विवेक बुद्धि वाला आदमी आता है तो हर चीज को उसकी जगह दिखाता है.


अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः
स्वल्पश्च कालो बहुविघ्नता च ।
यत्सारभूतं तदुपासनीयां
हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात् ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 10)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

शास्त्रों का ज्ञान अगाध है. वो कलाए अनंत जो हमें सीखनी छाहिये. हमारे पास समय थोडा है. जो सिखने के मौके है उसमे अनेक विघ्न आते है. इसीलिए वही सीखे जो अत्यंत महत्वपूर्ण है. उसी प्रकार जैसे हंस पानी छोड़कर उसमे मिला हुआ दूध पी लेता है.


दूरागतं पथि श्रान्तं वृथा च गृहमागतम् ।
अनर्चयित्वा यो भुङ्क्ते स वै चाण्डाल उच्यते ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 11)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह आदमी चंडाल है जो एक दूर से अचानक आये हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.


पठन्ति चतुरो वेदान्धर्मशास्त्राण्यनेकशः ।
आत्मानं नैव जानन्ति दर्वी पाकरसं यथा ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 12)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.


धन्या द्विजमयी नौका विपरीता भवार्णवे ।
तरन्त्यधोगताः सर्वे उपरिष्ठाः पतन्त्यधः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 13)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह लोग धन्य है, ऊँचे उठे हुए है जिन्होंने संसार समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली. उनकी शरणागति ने नौका का काम किया. वे ऐसे मुसाफिरों की तरह नहीं है जो ऐसे सामान्य जहाज पर सवार है जिसके डूबने का खतरा है.


अयममृतनिधानं नायकोऽप्योषधीनाम्
अमृतमयशरीरः कान्तियुक्तोऽपि चन्द्रः ।
भवतिविगतरश्मिर्मण्डलं प्राप्य भानोः
परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 14)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

चन्द्रमा जो अमृत से लबालब है और जो औषधियों की देवता माना जाता है, जो अमृत के समान अमर और दैदीप्यमान है. उसका क्या हश्र होता है जब वह सूर्य के घर जाता है अर्थात दिन में दिखाई देता है. तो क्या एक सामान्य आदमी दुसरे के घर जाकर लघुता को नहीं प्राप्त होगा.


अलिरयं नलिनीदलमध्यगः
कमलिनीमकरन्दमदालसः ।
विधिवशात्परदेशमुपागतः
कुटजपुष्परसं बहु मन्यते ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 15)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यह मधु मक्खी जो कमल की नाजुक पंखडियो में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, वह अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना ताव मारती है. क्यों की वह ऐसे देश में आ गयी है जहा कमल है ही नहीं, उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते है.


पीतः क्रुद्धेन तातश्चरणतलहतो वल्लभो येन रोषा
दाबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी मे ।
गेहं मे छेदयन्ति प्रतिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं
तस्मात्खिन्ना सदाहं द्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 16)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हे भगवान् विष्णु, मेरे स्वामी, मै ब्राह्मणों के घर में इस लिए नहीं रहती क्यों की….. अगस्त्य ऋषि ने गुस्से में समुद्र को ( जो मेरे पिता है) पी लिया. भृगु मुनि ने आपकी छाती पर लात मारी. ब्राह्मणों को पढने में बहोत आनंद आता है और वे मेरी जो स्पर्धक है उस सरस्वती की हरदम कृपा चाहते है. और वे रोज कमल के फूल को जो मेरा निवास है जलाशय से निकलते है और भगवान् शिव की पूजा करते है.


बन्धनानि खलु सन्ति बहूनि
प्रेमरज्जुकृतबन्धनमन्यत् ।
दारुभेदनिपुणोऽपि षडंघ्रि-
र्निष्क्रियो भवति पंकजकोशेः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 17)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

दुनिया में बाँधने के ऐसे अनेक तरीके है जिससे व्यक्ति को प्रभाव में लाया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है. सबसे मजबूत बंधन प्रेम का है. इसका उदाहरण वह मधु मक्खी है जो लकड़ी को छेड़ सकती है लेकिन फूल की पंखुडियो को छेदना पसंद नहीं करती चाहे उसकी जान चली जाए


पतिर्नजहातिलीलाम् उअन्त्रार्पितोमघुग्तनिजहातिचेक्षुः
क्षीणो पिनत्यजितशीलगुणान्कुलीनः ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 18)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बुढा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता. उसी प्रकार ऊँचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों ना बसर करना पड़े.


उर्व्यां कोऽपि महीधरो लघुतरो दोर्भ्यां धृतो
लीलया तेन त्वं दिवि भूतले च सततं गोवर्धनो गीयसे ।
त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रे न तद्गण्यते
किं वा केशव भाषणेन बहुना पुण्यैर्यशो लभ्यते ॥

Chanakya Niti (Chap. 15 – Shloka 19)

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